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मछली उत्पादन हेतु योजनाएं

बिहार के 20 जिलों में मछली उत्पादन के लिए मध्य बिहार ग्रामीण बैंक एवं मत्स्य निदेशालय, बिहार के बीच मत्स्य निदेशालय द्वारा कार्यान्वित सभी योजनाओं से सम्बंधित ऋण आवेदन पत्रों को वित्त पोषित करने हेतु करार किया गया है।

विस्तृत जानकारी हेतु अपने जिले के जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

वर्तमान में मत्स्य निदेशालय द्वारा तीन योजनाओं के अंतर्गत मत्स्य विकास योजनाओं का संचालन किया जा रहा है:

  • केंद्रीय योजना-गत-योजना- "नीली क्रांति"- समेकित विकास एवं मत्स्य पालन के प्रबंधन: योजनान्तर्गत नए तालाब का निर्माण, आद्र भूमि का विकास, प्रथम वर्ष इनपुट, आद्र भूमि में अन्गूलिका का संचय, केज कल्चर, हैचरी का अधिष्ठापन तथा फिश फीड मिल का निर्माण हेतु योजना सम्मिलित है। इसके तहत 50% अनुदान भी बिहार सरकार द्वारा देय है जो बैक एंडेड होगी।
  • राज्य योजना अंतर्गत मुख्यमंत्री मत्स्य विकास परियोजना: इसके तहत अनुदानित दर पर बिज हैचरी, ट्यूबवेल एवं पुमप सेट, सोलर ट्यूबवेल एवं पम्प सेट का अधिष्ठापन तथा मोपेड-सह-आईस बॉक्स के वितरण सम्बन्धी योजना सम्मिलित है। इसके तहत 70% अनुदान भी बिहार सरकार द्वारा देय है जो बैक एंडेड होगी।
  • राज्य योजना अंतर्गत आद्र भूमि का विकास: तथा प्रथम वर्ष इनपुट के लिए योजना में होने वाले व्यय की स्वीकृति। इसके तहत 50% अनुदान भी बिहार सरकार द्वारा देय है जो बैक एंडेड होगी।

आवेदक इन योजनाओं के तहत आवेदन पत्र सम्बंधित जिलें के जिला मत्स्य पदाधिकारी-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को आवश्यक कागजात के साथ प्रेषित करेंगे। विभाग द्वारा आवेदन पत्र के विवरण की पुष्टि के उपरांत, आवेदन पत्र सभी अनुलग्नकों सहित, बैंक को ऋण मुहैया करने हेतु प्रेषित किया जाएगा।

योजना की मुख्य विशेषताएँ निम्न है

  • ऋण राशि: परियोजना राशि के 90% तक मियादी ऋण के रूप में।
  • मार्जिन: परियोजना राशि का 10% (जो ऋणियों द्वारा वहन किया जायेगा)।
  • पुनर्भुगतान अवधि: 5 से 10 वर्ष।
  • संपार्श्विक प्रतिभूति:
    • रु. 1.60 लाख (अनुदान राशि घटाने के उपरांत) से कम हेतु - शून्य
    • रु. 1.60 लाख (अनुदान राशि घटाने के उपरांत) से ऊपर हेतु - 100% के मूल्य का
संपार्श्विक प्रतिभूति (यथा जमीन, Cash Collateral (FDR/NSC/KVP) इत्यादि)
  • बीमा: लाभान्वितों के खर्च एवं जिम्मेदारी पर बैंक ऋण से क्रय की गई परिसंपत्तियों का बीमा।
  • जिला मत्स्य निदेशालय द्वारा योजनान्तर्गत अनुदान देय है।

विस्तृत जानकारी हेतु अपने जिले के जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।